पर्सनल लोन या होम लोन: बैंक आपकी इन 7 चीजों पर रखते हैं पैनी नजर, रिजेक्शन से बचने के लिए जानें पूरी बात
परिचय जब भी आप किसी बैंक या वित्तीय संस्थान में पर्सनल लोन, होम लोन या कार लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक केवल आपकी अर्जी देखकर तुरंत पैसा जारी नहीं कर देता। लोन मंजूर करने से
## परिचय
जब भी आप किसी बैंक या वित्तीय संस्थान में पर्सनल लोन, होम लोन या कार लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक केवल आपकी अर्जी देखकर तुरंत पैसा जारी नहीं कर देता। लोन मंजूर करने से पहले बैंकिंग एजेंसियां आवेदक की वित्तीय क्षमता, लेन-देन का इतिहास और उसके व्यवहार का गहराई से विश्लेषण करती हैं।
अक्सर आम लोग सोचते हैं कि अगर उनकी सैलरी अच्छी है या वे किसी बड़ी कंपनी में काम करते हैं, तो लोन आसानी से मिल जाएगा। हालांकि, बैंकिंग प्रणाली में ऐसा नहीं है। बैंक यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ग्राहक को दिया गया पैसा सही समय पर ईएमआई (EMI) के रूप में वापस आएगा या नहीं। इसके लिए बैंक ग्राहक के कई तरह के रिकॉर्ड खंगालते हैं ताकि डिफॉल्ट के जोखिम का सटीक अनुमान लगाया जा सके।
विस्तार और पृष्ठभूमि
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले दिशानिर्देशों और अनसिक्योर्ड लोन को लेकर सतर्कता के चलते बैंकों ने अपनी क्रेडिट असेसमेंट प्रक्रिया को काफी कड़ा कर दिया है। बैंक किसी भी आवेदक को लोन देने से पहले 7 मुख्य पैमानों पर बाज जैसी नजर रखते हैं:
### 1. क्रेडिट स्कोर और CIBIL हिस्ट्री बैंक सबसे पहले आवेदक का सिबिल (CIBIL) स्कोर चेक करते हैं। 750 या उससे अधिक का क्रेडिट स्कोर यह दर्शाता है कि आवेदक ने अतीत में अपने कर्ज का भुगतान समय पर किया है। कम स्कोर होने पर लोन एप्लीकेशन सीधे खारिज हो सकती है या फिर बैंक बहुत ऊंची ब्याज दर की मांग कर सकते हैं।
### 2. आय और रोजगार की स्थिरता मासिक आय का आकार महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि आय का स्रोत कितना स्थिर है। सरकारी कर्मचारियों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के वेतनभोगी वर्ग या स्थापित व्यवसायियों को लोन आसानी से मिलता है क्योंकि उनकी आय में जोखिम कम माना जाता है।
### 3. मौजूदा देनदारियां (FOIR Ratio) बैंक 'फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो' (FOIR) के जरिए यह देखते हैं कि आपकी कुल कमाई में से कितना हिस्सा पहले से चल रही ईएमआई, क्रेडिट कार्ड बिल या अन्य फिक्स्ड खर्चों में चला जाता है। अगर आपकी मासिक कमाई का 50% से अधिक हिस्सा पहले से तय खर्चों में जा रहा है, तो नया लोन मिलना कठिन हो जाता है।
### 4. नौकरी और करियर में निरंतरता यदि कोई व्यक्ति बहुत जल्दी-जल्दी नौकरी बदलता है या उसके व्यवसाय में लगातार उतार-चढ़ाव आता है, तो बैंक इसे वित्तीय अस्थिरता का संकेत मानते हैं। आमतौर पर बैंक चाहते हैं कि आवेदक वर्तमान संस्थान में कम से कम 1 वर्ष से कार्यरत हो।
### 5. आवेदक की उम्र और लोन चुकाने की अवधि आवेदक की उम्र यह तय करती है कि उसके पास लोन चुकाने के लिए कितने कामकाजी साल बचे हैं। युवा नौकरीपेशा लोगों को लंबी अवधि (Tenure) का लोन आसानी से मिल जाता है, जबकि रिटायरमेंट के करीब पहुंचे लोगों के लिए लोन की शर्तें सख्त हो जाती हैं।
### 6. बैंक स्टेटमेंट और वित्तीय अनुशासन बैंक पिछले 6 महीने से 1 साल का बैंक अकाउंट स्टेटमेंट चेक करते हैं। खाते में बार-बार मिनिमम बैलेंस न होना, चेक बाउंस का रिकॉर्ड होना या अस्वाभाविक लेन-देन दिखना आपके वित्तीय अनुशासन की कमी को दर्शाता है।
### 7. क्रेडिट यूटिलाइजेशन और पेमेंट बिहेवियर (निर्णायक प्वाइंट) यह सातवां और सबसे महत्वपूर्ण प्वाइंट है जिससे बैंक ग्राहक की मानसिकता का अंदाजा लगाते हैं। अगर आप अपने क्रेडिट कार्ड की उपलब्ध लिमिट का 30% से अधिक लगातार इस्तेमाल करते हैं, या कभी-कभी ईएमआई चुकाने में देरी करते हैं, तो बैंक यह मान लेते हैं कि आप आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। यही प्वाइंट यह तय कर देता है कि भविष्य में ग्राहक समय पर पैसा चुकाएगा या डिफॉल्ट करेगा।
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महत्वपूर्ण जानकारी
भरोसा (Bharosa) एक P2P लेंडिंग प्लेटफॉर्म है, नौकरी एजेंसी या सरकारी भर्ती पोर्टल नहीं। हम नौकरी दिलाने की गारंटी नहीं देते। पर्सनल लोन तभी लें जब EMI चुकाने की क्षमता हो। KYC दस्तावेज़, OTP, पासवर्ड या बैंक डिटेल किसी एजेंट, व्हाट्सऐप ग्रुप या अज्ञात लिंक पर साझा न करें। नौकरी या स्कीम की पुष्टि केवल आधिकारिक वेबसाइट और आधिकारिक नोटिफिकेशन से करें।