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BRICS में AI का नया दौर: चीन का 'ओपन वेट्स' प्रस्ताव और भारतीय डिजिटल इकोनॉमी पर इसका असर

AI & Fintech

BRICS में AI का नया दौर: चीन का 'ओपन वेट्स' प्रस्ताव और भारतीय डिजिटल इकोनॉमी पर इसका असर

परिचय वैश्विक अर्थव्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीकों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में ब्रिक्स (BRICS) देशों के मंच पर चीन द्वारा एआई मॉडल और डेटा शे

Bharosa AI Editor5 min read

परिचय

वैश्विक अर्थव्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीकों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में ब्रिक्स (BRICS) देशों के मंच पर चीन द्वारा एआई मॉडल और डेटा शेयरिंग को लेकर एक नया दृष्टिकोण पेश किया गया है, जिसे 'ओपन वेट्स, क्लोज्ड लूप्स' के रूप में देखा जा रहा है। इसका सीधा संबंध इस बात से है कि उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं एआई की तकनीक का मिलकर किस तरह इस्तेमाल करेंगी और वैश्विक डिजिटल दौड़ में अपनी जगह बनाएंगी। भारत के लिए यह मुद्दा बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश में फिनटेक, डिजिटल सार्वजनिक ढांचा (DPI), बैंकिंग और रोजगार का परिदृश्य एआई के बूते तेजी से बदल रहा है।

विस्तार और पृष्ठभूमि

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में चीन लगातार एआई सहयोग बढ़ाने की वकालत कर रहा है। 'ओपन वेट्स' का सीधा अर्थ एआई मॉडलों के उस बुनियादी ढांचे से है, जहाँ मॉडल के मुख्य कोड या पैरामीटर्स को साझेदारों के लिए सुलभ बनाया जाता है, जबकि 'क्लोज्ड लूप्स' उस इकोसिस्टम को दर्शाता है जहाँ डेटा प्रोसेसिंग और बुनियादी ढांचा एक नियंत्रित दायरे में रहता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फिनटेक में मुकाबला

वर्तमान में अमेरिका और पश्चिमी देशों के एआई दबदबे के बीच चीन चाहता है कि ब्रिक्स देश उसकी एआई तकनीकों और मानकों को अपनाएं। हालांकि, भारत का अपना एक बेहद मजबूत डिजिटल सार्वजनिक ढांचा है, जिसमें यूपीआई (UPI), आधार, और ओएनडीसी (ONDC) जैसे सफल वैश्विक मॉडल शामिल हैं। भारत सरकार की प्राथमिकता अपनी डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty) को सुरक्षित रखते हुए 'इंडिया एआई मिशन' (IndiaAI Mission) के जरिए स्वदेशी एआई इकोसिस्टम को मजबूत करना है।

वित्तीय क्षेत्र और फिनटेक की बात करें तो एआई का उपयोग अब केवल चैटबॉट तक सीमित नहीं है। डिजिटल क्रेडिट स्कोरिंग, लोन अप्रूवल, धोखाधड़ी की पहचान (Fraud Detection), और व्यक्तिगत बैंकिंग सेवाओं में एआई एल्गोरिदम की भूमिका प्राथमिक बनती जा रही है। यदि ब्रिक्स स्तर पर एआई मानकों को लेकर कोई सहमति बनती है, तो इसका असर भारतीय टेक स्टार्टअप्स, बैंकों और फिनटेक कंपनियों की कार्यप्रणाली पर भी पड़ेगा।

आम आदमी पर असर

वैश्विक मंचों पर एआई को लेकर होने वाली नीतियां और तकनीकी बदलाव अंततः भारत के आम नागरिकों, नौकरीपेशा युवाओं, छात्रों और छोटे कारोबारियों के दैनिक जीवन को प्रभावित करते हैं:

  • सस्ती और त्वरित फिनटेक सेवाएं: एआई आधारित ऑटोमेशन से बैंकों और फिनटेक कंपनियों की परिचालन लागत घटती है। इससे आम आदमी को तुरंत डिजिटल लोन, कम प्रोसेसिंग समय और बेहतर ग्राहक सेवाएं मिलती हैं।
  • छोटे कारोबारियों (MSME) के लिए नए टूल्स: एआई टूल्स का उपयोग करके छोटे व्यापारी अपने इन्वेंटरी प्रबंधन, डिजिटल बिलिंग और ग्राहकों तक पहुंच को आसान बना रहे हैं।
  • रोजगार और स्किलिंग में बदलाव: बैंकिंग, आईटी और रिटेल सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एआई टूल्स को समझना और सीखना अब अनिवार्य होता जा रहा है। नई नौकरियों में डिजिटल दक्षता की मांग बढ़ी है।
  • साइबर सुरक्षा की चुनौती: एआई के विकास से जहाँ एक तरफ साइबर फ्रॉड को पहचानना आसान हुआ है, वहीं दूसरी तरफ डीपफेक और वॉयस क्लोनिंग के जरिए वित्तीय ठगी का जोखिम भी बढ़ा है।

क्या जाँचें

डिजिटल युग और एआई आधारित वित्तीय सेवाओं का लाभ उठाते समय आम नागरिकों को कुछ महत्वपूर्ण बातों की जांच-परख अवश्य करनी चाहिए:

1. वित्तीय ऐप्स की प्रामाणिकता: लोन, निवेश या बैंकिंग के लिए किसी भी ऐप का इस्तेमाल करने से पहले यह जांच लें कि वह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा पंजीकृत है या नहीं। 2. डेटा एक्सेस की समीक्षा: अपने स्मार्टफोन पर किसी भी नए डिजिटल टूल या एआई ऐप को इंस्टॉल करते समय अनावश्यक परमिशन (जैसे कॉल लॉग्स, कॉन्टैक्ट्स या गैलरी) देने से बचें। 3. रोजगार और लोन के झूठे दावे: एआई या डिजिटल माध्यमों से मिलने वाली नौकरियों और तुरंत लोन के लुभावने ऑफर्स से सतर्क रहें और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी की पुष्टि करें।

महत्वपूर्ण जानकारी

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