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AI टूल्स से साइबर ठगों ने बैंकों में लगाई सेंध, सरकार ने जारी किया अलर्ट

AI & Fintech

AI टूल्स से साइबर ठगों ने बैंकों में लगाई सेंध, सरकार ने जारी किया अलर्ट

परिचय डिजिटल भारत के इस दौर में जहां एक तरफ तकनीक ने हमारे बैंकिंग और वित्तीय कामों को आसान बनाया है, वहीं दूसरी तरफ साइबर अपराध की दुनिया में भी कई बड़े और खतरनाक बदलाव देखने को म

Bharosa AI Editor7 min read

परिचय

डिजिटल भारत के इस दौर में जहां एक तरफ तकनीक ने हमारे बैंकिंग और वित्तीय कामों को आसान बनाया है, वहीं दूसरी तरफ साइबर अपराध की दुनिया में भी कई बड़े और खतरनाक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। हाल ही में सामने आई खबरों के अनुसार, साइबर अपराधियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उन्नत टूल्स का सहारा लेकर बैंकिंग सेक्टर और आम जनता के खातों में सेंध लगानी शुरू कर दी है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने इस नई तरकीब को लेकर एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कैसे ये ठग AI तकनीक का गलत इस्तेमाल करके आम लोगों और वित्तीय संस्थानों को करोड़ों रुपये का चूना लगा रहे हैं। यदि आप भी इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो आपको इस नए खतरे के प्रति बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है।

विस्तार और पृष्ठभूमि

पिछले कुछ वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दायरा बहुत तेजी से बढ़ा है। जहां एक ओर कंपनियां इसका उपयोग ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने के लिए कर रही हैं, वहीं जालसाजों ने इसे अपना नया हथियार बना लिया है। साइबर ठग अब साधारण फोन कॉल या मैसेज के बजाय AI टूल्स का इस्तेमाल करके बेहद चालाकी से धोखाधड़ी कर रहे हैं।

सरकारी एजेंसियों के अनुसार, ये ठग मुख्य रूप से निम्नलिखित तरीकों से बैंकिंग सुरक्षा में सेंध लगा रहे हैं:

  • वॉइस क्लोनिंग (Voice Cloning): AI टूल्स की मदद से ठग किसी व्यक्ति या बैंक अधिकारी की आवाज की हूबहू नकल कर लेते हैं। इसके बाद वे ग्राहकों को कॉल करके ऐसा माहौल बनाते हैं कि सामने वाला व्यक्ति डर या जल्दबाजी में अपनी गोपनीय जानकारी साझा कर देता है।
  • डीपफेक वीडियो (Deepfake Technology): वीडियो कॉल के माध्यम से रिश्तेदारों या किसी बैंक कर्मचारी का चेहरा बनाकर लोगों को यह विश्वास दिलाया जाता है कि वे किसी संकट में हैं या उनका खाता बंद होने वाला है, जिससे लोग पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।
  • सटीक फिशिंग मैसेज (AI Phishing): पहले आने वाले फर्जी मैसेज में व्याकरण की गलतियां होती थीं, लेकिन अब AI टूल्स बिना किसी गलती के ऐसे मैसेज और ईमेल तैयार करते हैं जो बिल्कुल असली बैंकिंग मैसेज जैसे लगते हैं।
  • फर्जी लोन और बैंकिंग ऐप: AI का उपयोग करके असली जैसे दिखने वाले बैंकिंग इंटरफेस और फर्जी लोन ऐप्स तैयार किए जा रहे हैं, जो यूजर्स के मोबाइल से डेटा चोरी कर लेते हैं।

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधियों का यह नया तरीका बैंकों के ऑटोमेटेड सिक्योरिटी सिस्टम को भी कभी-कभी भ्रमित कर देता है। यही वजह है कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार वित्तीय संस्थानों और आम जनता को अपनी डिजिटल सुरक्षा मजबूत करने की सलाह दे रहे हैं।

आम आदमी पर असर

इस नए प्रकार के साइबर क्राइम का सबसे सीधा और बुरा असर देश के आम लोगों पर पड़ रहा है। चाहे वे खेती-किसानी करने वाले किसान हों, नौकरीपेशा लोग हों, छोटे व्यापारी हों या पढ़ाई कर रहे छात्र—हर कोई इन ठगों के निशाने पर है।

वित्तीय नुकसान और मानसिक तनाव

जब किसी व्यक्ति की जीवन भर की कमाई एक झटके में गायब हो जाती है, तो उसे न केवल वित्तीय नुकसान झेलना पड़ता है बल्कि गंभीर मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ता है। अक्सर लोग किसी इमरजेंसी के नाम पर आई AI जेनरेटेड कॉल पर विश्वास कर बैठते हैं और बिना सोचे-समझे पैसे भेज देते हैं।

डिजिटल ठगी का आम जनता पर निम्नलिखित तरीकों से प्रभाव पड़ रहा है:

  • CIBIL स्कोर और क्रेडिट हिस्ट्री पर असर: यदि किसी व्यक्ति के नाम पर फर्जी तरीके से लोन ले लिया जाता है, तो उसका CIBIL स्कोर खराब हो जाता है, जिससे भविष्य में असली लोन मिलने में भारी कठिनाई होती है।
  • गाढ़ी कमाई का नुकसान: बैंक खाते से अचानक पैसे गायब हो जाने से दैनिक खर्च, बच्चों की फीस और मेडिकल इमरजेंसी जैसे जरूरी काम रुक जाते हैं।
  • डिजिटल बैंकिंग पर से भरोसा कम होना: बार-बार हो रही ठगी की घटनाओं से आम लोग यूपीआई और ऑनलाइन बैंकिंग का उपयोग करने से डरने लगे हैं।

क्या जाँचें

साइबर ठगी के इस दौर में सुरक्षा ही सबसे बड़ा बचाव है। सरकार और सुरक्षा विशेषज्ञों ने आम नागरिकों को सलाह दी है कि वे ऑनलाइन बैंकिंग या किसी भी वित्तीय लेनदेन के दौरान निम्नलिखित बातों की जांच जरूर करें:

  • कॉल करने वाले की पहचान की पुष्टि करें: यदि आपके पास किसी रिश्तेदार या बैंक अधिकारी की आवाज में कॉल आती है जिसमें तुरंत पैसे मांगे जा रहे हों, तो बिना हड़बड़ाए कॉल काटें और उस व्यक्ति को उसके दूसरे नंबर पर कॉल करके पुष्टि करें।
  • अनधिकृत लिंक पर क्लिक न करें: एसएमएस या व्हाट्सऐप पर आए किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें। बैंक कभी भी मैसेज में लिंक भेजकर केवाईसी अपडेट करने को नहीं कहते।
  • आधिकारिक ऐप का ही इस्तेमाल करें: गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से ऐप डाउनलोड करते समय डेवलपर की जानकारी और रिव्यू जरूर जांचें।
  • द्वि-स्तरीय प्रमाणीकरण (2-Factor Authentication): अपने सभी बैंकिंग और सोशल मीडिया खातों पर 2FA चालू रखें।
  • शिकायत दर्ज कराने में देरी न करें: यदि आपके साथ किसी भी तरह की धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत अपने बैंक को सूचित करें और साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर (1930) पर या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

महत्वपूर्ण जानकारी

भरोसा (Bharosa) एक P2P लेंडिंग प्लेटफॉर्म है, नौकरी एजेंसी या सरकारी भर्ती पोर्टल नहीं। हम नौकरी दिलाने की गारंटी नहीं देते। पर्सनल लोन तभी लें जब EMI चुकाने की क्षमता हो। KYC दस्तावेज़, OTP, पासवर्ड या बैंक डिटेल किसी एजेंट, व्हाट्सऐप ग्रुप या अज्ञात लिंक पर साझा न करें। नौकरी या स्कीम की पुष्टि केवल आधिकारिक वेबसाइट और आधिकारिक नोटिफिकेशन से करें।

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