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भारत में रिटेल क्रेडिट में बड़ा उछाल, अनसिक्योर्ड लोन की मांग 26% बढ़ी: जानिए इसका आप पर क्या होगा असर

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भारत में रिटेल क्रेडिट में बड़ा उछाल, अनसिक्योर्ड लोन की मांग 26% बढ़ी: जानिए इसका आप पर क्या होगा असर

परिचय भारतीय बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र से एक बड़ा और महत्वपूर्ण आंकड़ा सामने आया है। देश में रिटेल क्रेडिट यानी आम उपभोक्ताओं द्वारा लिए जाने वाले कर्ज में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की

Bharosa AI Editor6 min read

परिचय

भारतीय बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र से एक बड़ा और महत्वपूर्ण आंकड़ा सामने आया है। देश में रिटेल क्रेडिट यानी आम उपभोक्ताओं द्वारा लिए जाने वाले कर्ज में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अनसिक्योर्ड लोन (Unsecured Loans) जैसे कि पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन की प्रोसेसिंग और सोर्सिंग में 26% का बड़ा उछाल देखा गया है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था में लोगों की बढ़ती खर्च करने की क्षमता और डिजिटल बैंकिंग के तेजी से फैलाव को दर्शाती है। हालांकि, अनसिक्योर्ड लोन में इस तरह की तेज वृद्धि को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और वित्तीय विश्लेषक सतर्कता बरतने की सलाह भी दे रहे हैं।

विस्तार और पृष्ठभूमि

पिछले कुछ वर्षों में भारत में बैंकिंग और एनबीएफसी (NBFCs) के काम करने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव आया है। आज मोबाइल ऐप के जरिए महज कुछ मिनटों में पर्सनल लोन मिल जाता है। इसी आसान प्रक्रिया के कारण बाजार में अनसिक्योर्ड क्रेडिट की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है।

अनसिक्योर्ड लोन वे कर्ज होते हैं जिनके लिए लोन लेने वाले को बैंक के पास कोई संपत्ति, सोना या प्रॉपर्टी गिरवी नहीं रखनी पड़ती। बैंक मुख्य रूप से व्यक्ति के CIBIL स्कोर, सैलरी, रोजगार की स्थिरता और बैंक स्टेटमेंट के आधार पर यह लोन मंजूर करते हैं।

सोर्सिंग में 26% की इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण माने जा रहे हैं: डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स: फिनटेक ऐप्स और यूपीआई (UPI) के जरिए छोटे कर्ज लेना बेहद आसान हो गया है। बढ़ती उपभोक्ता आकांक्षाएं: त्योहारों, यात्राओं, इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदारी और व्यक्तिगत जरूरतों के लिए लोग अब लोन लेने से संकोच नहीं करते। सुव्यवस्थित क्रेडिट डेटा:* CIBIL और अन्य क्रेडिट ब्यूरो के कारण बैंकों के लिए ग्राहकों की साख जांचना और तुरंत लोन पास करना आसान हो गया है।

तथापि, रिजर्व बैंक ने बैंकिंग प्रणाली में जोखिम को कम करने के लिए बैंकों को निर्देश दिए हैं कि वे अनसिक्योर्ड लोन बांटते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें और अपने रिस्क वेट (Risk Weights) में संतुलन बनाए रखें।

सिक्योर्ड बनाम अनसिक्योर्ड लोन का अंतर

आम ग्राहकों को यह समझना जरूरी है कि सिक्योर्ड लोन (जैसे होम लोन या कार लोन) में ब्याज दरें आमतौर पर कम होती हैं क्योंकि इनमें संपत्ति सुरक्षित रहती है। इसके विपरीत, अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दरें काफी अधिक (12% से 36% या उससे भी ज्यादा) हो सकती हैं। यही वजह है कि ऐसे लोन की मांग बढ़ने से वित्तीय कंपनियों का मुनाफा तो बढ़ता है, लेकिन डिफॉल्ट का जोखिम भी अधिक होता है।

आम आदमी पर असर

अनसिक्योर्ड लोन की बढ़ती उपलब्धता का सीधा असर मध्यम वर्ग, नौकरीपेशा लोगों और छोटे व्यवसायियों के जीवन पर पड़ रहा है। जहां एक तरफ इसके फायदे हैं, वहीं दूसरी तरफ असावधानी बरतने पर वित्तीय संकट का खतरा भी रहता है।

  • आपात स्थिति में राहत: मेडिकल इमरजेंसी या अचानक आए किसी बड़े खर्च के समय पर्सनल लोन एक त्वरित समाधान प्रदान करता है।
  • कर्ज के जाल (Debt Trap) का जोखिम: बिना योजना बनाए एक से अधिक लोन लेने या क्रेडिट कार्ड का न्यूनतम भुगतान (Minimum Due) करने से लोग भारी कर्ज के जाल में फंस सकते हैं।
  • CIBIL स्कोर पर प्रभाव: समय पर ईएमआई (EMI) न चुकाने से क्रेडिट स्कोर खराब होता है, जिससे भविष्य में होम लोन या बिजनेस लोन मिलना मुश्किल हो जाता है।
  • बजट पर दबाव: मासिक आय का एक बड़ा हिस्सा ईएमआई में चले जाने से घरेलू वित्तीय संतुलन और बचत प्रभावित होती है।

क्या जाँचें

यदि आप भी किसी प्रकार का पर्सनल लोन, इंस्टेंट लोन या क्रेडिट कार्ड लेने का विचार कर रहे हैं, तो आवेदन करने से पहले निम्नलिखित बातों की गहन जांच अवश्य करें:

1. वार्षिक ब्याज दर (APR): केवल मासिक ब्याज दर न देखें, बल्कि कुल वार्षिक ब्याज दर और अन्य छिपे हुए शुल्कों (Processing Fees, Prepayment Charges) की जानकारी लें। 2. EMI चुकाने की क्षमता: आपकी सभी ईएमआई मिलाकर आपकी कुल मासिक आय के 30-40% से अधिक नहीं होनी चाहिए। 3. संस्था की मान्यता: लोन हमेशा RBI द्वारा पंजीकृत बैंक या एनबीएफसी (NBFC) से ही लें। किसी गैर-कानूनी या संदिग्ध लोन ऐप से बचें। 4. नियम और शर्तें: लोन एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ें और उसमें लिखी सभी शर्तों को समझने के बाद ही डिजिटल हस्ताक्षर करें। 5. CIBIL रिपोर्ट: लोन आवेदन से पहले अपनी फ्री क्रेडिट रिपोर्ट जांचें ताकि किसी गलत एंट्री का पता समय रहते चल सके।

महत्वपूर्ण जानकारी

भरोसा (Bharosa) एक P2P लेंडिंग प्लेटफॉर्म है, नौकरी एजेंसी या सरकारी भर्ती पोर्टल नहीं। हम नौकरी दिलाने की गारंटी नहीं देते। पर्सनल लोन तभी लें जब EMI चुकाने की क्षमता हो। KYC दस्तावेज़, OTP, पासवर्ड या बैंक डिटेल किसी एजेंट, व्हाट्सऐप ग्रुप या अज्ञात लिंक पर साझा न करें। नौकरी या स्कीम की पुष्टि केवल आधिकारिक वेबसाइट और आधिकारिक नोटिफिकेशन से करें।

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