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फेस्टिव सीजन से पहले 5 बैंकों ने बढ़ाए होम लोन रेट्स, जानिए आपकी EMI पर कितना पड़ेगा असर
परिचय भारत में त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है और ऐसे समय में हर साल लोग नया घर खरीदने या गाड़ियों की बुकिंग कराने की योजना बनाते हैं। हालांकि, इस फेस्टिव सीजन से ठीक पहले होम
परिचय
भारत में त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है और ऐसे समय में हर साल लोग नया घर खरीदने या गाड़ियों की बुकिंग कराने की योजना बनाते हैं। हालांकि, इस फेस्टिव सीजन से ठीक पहले होम लोन ग्राहकों के लिए एक बड़ा झटका देने वाली खबर आई है। देश के प्रमुख 5 बैंकिंग संस्थानों ने अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। ब्याज दरें बढ़ने का सीधा असर ग्राहकों की मासिक किश्त यानी EMI पर पड़ेगा। अगर आप भी नया घर खरीदने के लिए होम लोन लेने की सोच रहे हैं या पहले से ही फ्लोटिंग रेट पर लोन चल रहा है, तो अब आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है।
विस्तार और पृष्ठभूमि
बैंकिंग क्षेत्र में समय-समय पर फंड की लागत (Cost of Funds) और मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में बदलाव होते रहते हैं। जब भी बैंक अपने MCLR या रेपो रेट से जुड़े लैंडिंग रेट्स में बढ़ोतरी करते हैं, तो उनके द्वारा दिए जाने वाले तमाम तरह के लोन महंगे हो जाते हैं। हाल ही में पांच बड़े बैंकों ने अपनी कर्ज दरों में संशोधन किया है, जिससे होम लोन के साथ-साथ ऑटो लोन और पर्सनल लोन की दरें भी प्रभावित हुई हैं।
त्योहारों के समय आमतौर पर बैंक विशेष छूट या प्रोसेसिंग फीस में राहत के ऑफर लाते हैं। लेकिन इस बार ब्याज दरों में वृद्धि होने के कारण उन ऑफर्स का लाभ भी आंशिक रूप से कम हो सकता है। जानकारों का मानना है कि बैंकिंग प्रणाली में तरलता (Liquidity) के प्रबंधन और महंगाई दर के संतुलन को बनाए रखने के लिए बैंकों को अपनी कर्ज दरें बढ़ानी पड़ी हैं।
लोन महंगा होने का मुख्य गणित
जब भी लोन की ब्याज दरों में वृद्धि होती है, तो बैंक दो तरह के विकल्प अपनाते हैं। पहला विकल्प यह होता है कि आपकी EMI की राशि वही रहे लेकिन लोन की समयावधि (Tenure) बढ़ा दी जाए। दूसरा विकल्प यह होता है कि आपकी लोन की समयावधि समान रहे और मासिक EMI की राशि बढ़ा दी जाए। अधिकांश मामलों में, यदि लोन की अवधि पहले से ही काफी लंबी (जैसे 20 या 25 साल) है, तो बैंक सीधे EMI बढ़ा देते हैं, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों के मासिक बजट पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
आम आदमी पर असर
इस नए फैसले से आम वेतनभोगियों, छोटे व्यापारियों और मध्यमवर्गीय परिवारों के होम बजट पर काफी असर पड़ेगा। त्योहारों के दौरान जब अन्य घरेलू खर्च पहले से ही बढ़े हुए होते हैं, ऐसे में बढ़ी हुई EMI जेब पर और दबाव डालेगी।
- मासिक बजट का बिगड़ना: EMI की राशि बढ़ने से हर महीने होने वाली बचत में कमी आएगी।
- नए खरीदारों के लिए चुनौती: जो लोग इस फेस्टिव सीजन में नया घर खरीदने की सोच रहे थे, उन्हें अब अधिक ब्याज दर पर लोन स्वीकृत कराना होगा।
- लंबी अवधि के लोन पर अधिक ब्याज: लोन की दरें 0.10% से 0.25% तक भी बढ़ती हैं, तो 20 वर्ष के लंबे लोन पर कुल ब्याज का भुगतान लाखों रुपये तक बढ़ जाता है।
- रीफाइनांसिंग का विकल्प समझना: पुराने ग्राहकों को अब अन्य बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करके लोन ट्रांसफर करने के विकल्प पर विचार करना पड़ सकता है।
क्या जाँचें
यदि आपने पहले से लोन ले रखा है या नया लोन लेने जा रहे हैं, तो बिना किसी जल्दबाजी के निम्नलिखित बातों की गहराई से जांच कर लें:
- आधिकारिक वेबसाइट पर दरें देखें: ब्याज दरों में हुई सटीक बढ़ोतरी की पुष्टि केवल संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट से ही करें।
- लोन का प्रकार समझें: आपका लोन MCLR आधारित है, RLLR (रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट) से जुड़ा है या फिक्स्ड रेट पर है, इसकी जांच करें।
- CIBIL स्कोर सुधारें: नया लोन लेते समय आपका क्रेडिट स्कोर या CIBIL जितना बेहतर होगा, आपको बैंक की ओर से उतनी ही प्रतिस्पर्धी दरें मिल सकती हैं।
- अतिरिक्त शुल्क की जानकारी: प्रोसेसिंग फीस, प्रशासनिक शुल्क और प्री-पेमेंट चार्जेस के बारे में बैंक से लिखित जानकारी लें।
महत्वपूर्ण जानकारी
भरोसा (Bharosa) एक P2P लेंडिंग प्लेटफॉर्म है, नौकरी एजेंसी या सरकारी भर्ती पोर्टल नहीं। हम नौकरी दिलाने की गारंटी नहीं देते। पर्सनल लोन तभी लें जब EMI चुकाने की क्षमता हो। KYC दस्तावेज़, OTP, पासवर्ड या बैंक डिटेल किसी एजेंट, व्हाट्सऐप ग्रुप या अज्ञात लिंक पर साझा न करें। नौकरी या स्कीम की पुष्टि केवल आधिकारिक वेबसाइट और आधिकारिक नोटिफिकेशन से करें।