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AI में भारत की कंपनियों का भारी निवेश, लेकिन इस्तेमाल में सिर्फ 6.7% ही सफल

AI & Fintech

AI में भारत की कंपनियों का भारी निवेश, लेकिन इस्तेमाल में सिर्फ 6.7% ही सफल

परिचय आज के दौर में आर्टिफिशियली इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर हर तरफ चर्चा हो रही है। ऐसा लग रहा है कि आने वाला भविष्य पूरी तरह से तकनीक के भरोसे ही चलेगा। भारत में भी आईटी, बैंकिंग

Bharosa AI Editor6 min read

परिचय

आज के दौर में आर्टिफिशियली इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर हर तरफ चर्चा हो रही है। ऐसा लग रहा है कि आने वाला भविष्य पूरी तरह से तकनीक के भरोसे ही चलेगा। भारत में भी आईटी, बैंकिंग और अन्य सेक्टर की कंपनियां AI को अपनाने में पीछे नहीं रहना चाहती हैं। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की लगभग 77 प्रतिशत कंपनियों ने अपने बजट में AI के लिए निवेश बढ़ा दिया है। कंपनियों को लगता है कि अगर उन्होंने इस नई तकनीक को समय पर नहीं अपनाया, तो वे प्रतिस्पर्धी बाजार में पीछे छूट जाएंगी।

लेकिन इस बड़े निवेश के सिक्के का दूसरा पहलू काफी चौंकाने वाला है। बजट बढ़ाने और बड़े-बड़े दावे करने के बावजूद, केवल 6.7 प्रतिशत कंपनियां ही ऐसी हैं जो अपने बिजनेस मॉडल में AI का वास्तविक और प्रभावी इस्तेमाल कर पा रही हैं। यह आंकड़ा यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या वाकई AI कॉर्पोरेट जगत के लिए एक वास्तविक क्रांति बन चुका है या फिलहाल यह केवल एक नया ट्रेंड या हौवा बनकर रह गया है।

विस्तार और पृष्ठभूमि

भारत में डिजिटल क्रांति के बाद से ही फिनटेक, आईटी और सर्विस सेक्टर में ऑटोमेशन का इस्तेमाल बढ़ा है। कंपनियां अपने कामकाज को आसान बनाने, ग्राहकों को बेहतर सेवा देने और लागत में कटौती करने के लिए AI टूल्स में भारी मात्रा में पैसा लगा रही हैं। हालांकि, जमीन पर इसके नतीजे अभी भी सीमित नजर आ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस असंतुलन के पीछे कई मुख्य कारण हैं। सबसे बड़ी समस्या सही इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल मैनपावर और डेटा प्राइवेसी की है। कंपनियां बजट तो आवंटित कर देती हैं, लेकिन उनके पास ऐसे विशेषज्ञ नहीं होते जो AI टूल्स को कंपनी के पुराने सिस्टम से जोड़ सकें।

AI के इस्तेमाल में आने वाली मुख्य चुनौतियां

  • कुशल प्रतिभा की कमी: भारतीय बाजार में AI टेक्नोलॉजी को समझने और लागू करने वाले डेटा वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की भारी कमी है।
  • डेटा प्रबंधन और सुरक्षा: कंपनियां बहुत सारा डेटा एकत्र तो कर लेती हैं, लेकिन उसे सुरक्षित और सही तरीके से प्रोसेस करना एक बड़ी चुनौती है।
  • सॉफ्टवेयर का पुराना होना: कई पारंपरिक कंपनियों के पास आज भी पुराने सॉफ्टवेयर मौजूद हैं, जिनमें नए AI मॉडल आसानी से फिट नहीं बैठते।
  • रणनीति का अभाव: केवल देखा-देखी में AI टूल्स खरीद लेना और बिना किसी स्पष्ट बिजनेस प्लान के उन्हें लागू करना भी असफलता का बड़ा कारण है।

आम आदमी पर असर

जब कंपनियां तकनीक में बदलाव करती हैं, तो उसका सीधा असर वहां काम करने वाले कर्मचारियों और आम नागरिकों पर पड़ता है। एक तरफ जहां कर्मचारियों के मन में अपनी नौकरी जाने का डर रहता है, वहीं दूसरी तरफ ग्राहकों को यह उम्मीद होती है कि AI से उन्हें बेहतर सेवाएं मिलेंगी।

लेकिन इस रिपोर्ट से यह साफ होता है कि फिलहाल नौकरियां अचानक गायब नहीं हो रही हैं, क्योंकि कंपनियां खुद इस तकनीक को सही से लागू नहीं कर पा रही हैं। आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है, इसे कुछ बिंदुओं में समझा जा सकता है:

  • स्किल अपग्रेडेशन की जरूरत: अगर आप नौकरीपेशा हैं या छात्र हैं, तो आपको केवल बुनियादी कंप्यूटर ज्ञान के भरोसे नहीं रहना चाहिए। AI और डिजिटल टूल्स की समझ बढ़ाना अब जरूरी हो गया है।
  • बैंकिंग और फिनटेक में बदलाव: बैंकों और लोन देने वाले ऐप्स में AI का इस्तेमाल फ्रॉड रोकने और क्रेडिट स्कोर जांचने के लिए हो रहा है, लेकिन अंतिम फैसला अभी भी मानवीय जांच पर निर्भर करता है।
  • रोजगार के नए अवसर: भले ही पुरानी नौकरियों पर संकट हो, लेकिन AI प्रॉम्प्ट इंजीनियर, डेटा एनालिस्ट और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए नए रोजगार के दरवाजे खुल रहे हैं।
  • सेवाओं की गुणवत्ता: जब तक कंपनियां AI का सही उपयोग नहीं सीखतीं, तब तक कस्टमर केयर चैटबॉट जैसी सेवाओं में ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

क्या जाँचें

यदि आप किसी कंपनी में काम करते हैं या नई नौकरी की तलाश में हैं, तो आपको यह देखना होगा कि आपकी कंपनी में तकनीक का कितना सही इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा डिजिटल लोन, वित्तीय लेनदेन या ऑनलाइन नौकरी के आवेदनों के दौरान कुछ सावधानियां बरतनी बेहद जरूरी हैं।

निवेशकों और आम ग्राहकों को किसी भी कंपनी के बड़े-बड़े विज्ञापनों से भ्रमित नहीं होना चाहिए। कंपनियों द्वारा AI अपनाने के दावों के बीच यह जांचना जरूरी है कि क्या वाकई उनकी सेवाएं पहले से बेहतर और सुरक्षित हुई हैं। किसी भी वित्तीय फैसले से पहले आपको आधिकारिक नोटिफिकेशन और सही जानकारी की पुष्टि जरूर करनी चाहिए।

महत्वपूर्ण जानकारी

भरोसा (Bharosa) एक P2P लेंडिंग प्लेटफॉर्म है, नौकरी एजेंसी या सरकारी भर्ती पोर्टल नहीं। हम नौकरी दिलाने की गारंटी नहीं देते। पर्सनल लोन तभी लें जब EMI चुकाने की क्षमता हो। KYC दस्तावेज़, OTP, पासवर्ड या बैंक डिटेल किसी एजेंट, व्हाट्सऐप ग्रुप या अज्ञात लिंक पर साझा न करें। नौकरी या स्कीम की पुष्टि केवल आधिकारिक वेबसाइट और आधिकारिक नोटिफिकेशन से करें।

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