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शेयर बाजार की गिरावट में भी FII के पसंदीदा इन स्टॉक्स ने दिया 89% तक रिटर्न
परिचय भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला महीना यानी सितंबर काफी हलचल भरा रहा। एक तरफ जहां बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी (Nifty) और सेंसेक्स (Sensex) में करीब 6 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की
परिचय
भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला महीना यानी सितंबर काफी हलचल भरा रहा। एक तरफ जहां बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी (Nifty) और सेंसेक्स (Sensex) में करीब 6 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, वहीं दूसरी तरफ कुछ चुनिंदा शेयरों ने निवेशकों को मालामाल कर दिया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की मजबूत हिस्सेदारी वाले कम से कम आठ ऐसे शेयर सामने आए हैं, जिन्होंने बाजार के इस मंदी के दौर में भी 89 प्रतिशत तक का तगड़ा रिटर्न दिया है।
आम तौर पर जब बाजार गिरता है, तो छोटे और खुदरा निवेशक घबराकर अपने शेयर बेचने लगते हैं। लेकिन इस बीच बड़ी संस्थागत निवेशक कंपनियां और FII उन कंपनियों पर दांव लगाते हैं जिनका फंडामेंटल मजबूत होता है। सितंबर के महीने में आई इस गिरावट के बावजूद FII समर्थित कुछ शेयरों के इस शानदार प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सही रिसर्च और मजबूत पोर्टफोलियो के साथ शेयर बाजार में किसी भी माहौल में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।
विस्तार और पृष्ठभूमि
दिसंबर और सितंबर के दौर में वैश्विक आर्थिक दबाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के कारण भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का माहौल बना हुआ था। निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही प्रमुख सूचकांकों में 6% तक का नुकसान देखा गया, जिससे निवेशकों के अरबों रुपये डूब गए। हालांकि, इस भारी बिकवाली के बीच विदेशी निवेशकों यानी FIIs की नजर कुछ खास सेक्टरों और मिडकैप या स्मॉलकैप कंपनियों पर बनी रही।
शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि FII उन कंपनियों में निवेश बनाए रखते हैं या नया निवेश करते हैं, जिनकी आय में वृद्धि (Earnings Growth) बेहतर होती है और जिनका बैलेंस शीट मजबूत होता है। सितंबर के महीने में जिन आठ शेयरों ने 89% तक का रिटर्न दिया, उनके पीछे सबसे बड़ा कारण यह रहा कि उनमें FII की लगातार खरीदारी जारी थी। जब आम निवेशक बाजार से बाहर निकल रहे थे, तब इन कंपनियों के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और विदेशी फंड्स के सपोर्ट ने इनके शेयरों के भाव को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।
FII की हिस्सेदारी का क्या होता है महत्व?
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) जब किसी कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी खरीदते हैं, तो इसे उस कंपनी के भविष्य के प्रति एक सकारात्मक संकेत माना जाता है। FII के पास उच्च स्तर की रिसर्च टीमें और संसाधन होते हैं। इसलिए, जिन कंपनियों में FII की हिस्सेदारी अधिक होती है या बढ़ रही होती है, उन पर आम निवेशकों का भरोसा भी बढ़ता है। हालांकि, केवल FII हिस्सेदारी देखकर ही आंख मूंदकर निवेश करना सही नहीं होता, लेकिन यह सही शेयर चुनने का एक महत्वपूर्ण पैमाना जरूर बन जाता है।
आम आदमी पर असर
शेयर बाजार की यह उठापटक केवल बड़े ट्रेडर्स या ब्रोकरेज फर्मों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका सीधा असर आपके और हमारे जैसे आम मध्यमवर्गीय परिवारों की वित्तीय स्थिति पर भी पड़ता है। आज के समय में अधिकांश लोग म्यूचुअल फंड, SIP या डायरेक्ट इक्विटी के जरिए शेयर बाजार से जुड़े हुए हैं।
- SIP और म्यूचुअल फंड निवेशकों पर असर: बाजार में 6% की गिरावट से ज्यादातर इक्विटी म्यूचुअल फंड्स की NAV नीचे आई है, जिससे पोर्टफोलियो का वैल्यूएशन कम दिखा है।
- सही शेयरों का चुनाव: जो लोग सीधे शेयरों में ट्रेडिंग या निवेश करते हैं, उनके लिए यह एक सीख है कि केवल सूचकांक देखने के बजाय सही कंपनियों (Stock Specific) का चयन करना कितना जरूरी है।
- भविष्य की प्लानिंग: बाजार की गिरावट में पैनिक सेलिंग (घबराहट में बेचना) करने वाले निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ता है, जबकि FII के ट्रेंड को समझने वाले निवेशक सही समय पर एंट्री लेकर मुनाफा कमा लेते हैं।
- ऋण और ब्याज दरों से जुड़ाव: शेयर बाजार का रुख देश की आर्थिक स्थिति और RBI की मौद्रिक नीतियों को भी प्रभावित करता है, जिसका असर आगे चलकर होम लोन और कार लोन की EMI पर पड़ सकता है।
क्या जाँचें
यदि आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं या भविष्य में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो किसी भी शेयर को खरीदने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों की जांच अवश्य करें:
1. कंपनी का फंडामेंटल: केवल किसी शेयर के 89% रिटर्न देने की खबर देखकर निवेश न करें। कंपनी का बिजनेस मॉडल, मुनाफा और कर्ज का स्तर जांचें। 2. FII और DII डेटा: यह देखें कि पिछले कुछ तिमाहियों में FII और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने उस शेयर में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है या घटाई है। 3. बाजार का जोखिम: शेयर बाजार में गारंटीड रिटर्न जैसा कुछ नहीं होता। उच्च रिटर्न वाले शेयर अधिक जोखिम भरे भी हो सकते हैं। 4. CIBIL और लोन से बचें: शेयर बाजार या FII के शेयरों में दांव लगाने के लिए कभी भी पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड से पैसे न निकालें। अगर बाजार गिरता है तो आपकी EMI का बोझ बढ़ जाएगा और CIBIL स्कोर भी खराब हो सकता है।
महत्वपूर्ण जानकारी
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