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भारतीय बैंकों में घटते बैड लोन के बीच नया खतरा: जानिए आपकी जेब और लोन पर क्या होगा असर

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भारतीय बैंकों में घटते बैड लोन के बीच नया खतरा: जानिए आपकी जेब और लोन पर क्या होगा असर

परिचय भारतीय बैंकिंग क्षेत्र से हाल के दिनों में एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। देश के सरकारी और निजी बैंकों का बैड लोन यानी एनपीए (NPA - Non-Performing Assets) पिछले कुछ वर्षों

Bharosa AI Editor6 min read

परिचय

भारतीय बैंकिंग क्षेत्र से हाल के दिनों में एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। देश के सरकारी और निजी बैंकों का बैड लोन यानी एनपीए (NPA - Non-Performing Assets) पिछले कुछ वर्षों के निचले स्तर पर आ गया है। बैंकों की बैलेंस शीट पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और साफ-सुथरी नजर आ रही है। हालांकि, बैंकिंग विशेषज्ञों और वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि इस जगमगाहट के पीछे एक नया जोखिम धीरे-धीरे आकार ले रहा है।

सफेद कपड़ों पर लगे दागों को साफ करने के बाद अब बैंकों के सामने बिना गारंटी वाले लोन (Unsecured Loans) और रिटेल क्रेडिट की तेज रफ्तार एक नई चुनौती बनकर उभर रही है। यदि इस उभरते जोखिम को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आम कर्जदारों, जमाकर्ताओं और पूरे वित्तीय तंत्र पर इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है।

विस्तार और पृष्ठभूमि

पिछले कुछ सालों में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार के कड़े नियमों के कारण बैंकों ने अपने पुराने फंसे हुए कर्ज यानी बैड लोन की बड़े पैमाने पर रिकवरी की है। कॉर्पोरेट घरानों को दिए गए बड़े-बड़े लोन जो पहले डूब रहे थे, उन्हें राइट-ऑफ किया गया या फिर इंसॉलवेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के जरिए वसूला गया। इसके परिणामस्वरूप बैंकों का ग्रॉस एनपीए काफी घट गया है।

लेकिन इस सिक्के का दूसरा पहलू भी है। बड़े कॉर्पोरेट लोन में सख्ती होने के बाद बैंकों ने अपना पूरा ध्यान रिटेल सेगमेंट यानी आम जनता को दिए जाने वाले लोन पर केंद्रित कर दिया। पिछले दो-तीन वर्षों में पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड, और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन की मांग में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है।

अनसिक्योर्ड लोन का बढ़ता बाजार

बिना किसी गारंटी या कॉलेटरल के दिए जाने वाले लोन को अनसिक्योर्ड लोन कहा जाता है। आज डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक ऐप्स के जरिए महज कुछ मिनटों में क्रेडिट कार्ड और इंस्टेंट पर्सनल लोन मिल जाते हैं।

  • क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन: बैंकों ने मुनाफा बढ़ाने के लिए छोटी अवधि के और उच्च ब्याज दर वाले लोन बांटने में तेजी दिखाई है।
  • बढ़ती ईएमआई संस्कृति: युवाओं और वेतनभोगी वर्ग में बिना सोचे-समझे लोन लेकर खर्च करने की आदत बढ़ी है।
  • आरबीआई की चेतावनी: रिजर्व बैंक ने भी अनसिक्योर्ड रिटेल लोन में हो रही तेज बढ़ोतरी को लेकर चिंता जताई थी और बैंकों को अपने रिस्क वेट (Risk Weights) बढ़ाने के निर्देश दिए थे।

बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आर्थिक सुस्ती आती है या रोजगार के अवसरों में कमी आती है, तो ये अनसिक्योर्ड लोन सबसे पहले डिफॉल्ट होंगे। यही वह छिपा हुआ जोखिम है जो सतह के नीचे धीरे-धीरे बढ़ रहा है।

आम आदमी पर असर

बैंकिंग सेक्टर में होने वाली हर छोटी-बड़ी हलचल का सीधा असर देश के सामान्य नागरिकों, मध्यवर्ग, किसानों और छोटे कारोबारियों पर पड़ता है। जब बैंकों का जोखिम बढ़ता है, तो वे अपनी नीतियों में बदलाव करते हैं।

  • लोन मिलना हो सकता है मुश्किल: बैंकों द्वारा जोखिम महसूस करने पर पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड की अप्रूवल दरें घट सकती हैं। बैंक अब अधिक सख्ती से आवेदनों की जांच करेंगे।
  • ब्याज दरों में बढ़ोतरी: जोखिम की भरपाई के लिए बैंक नए लोन पर ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं, जिससे आपकी ईएमआई (EMI) महंगी हो सकती है।
  • सिबिल स्कोर (CIBIL Score) का महत्व: यदि आपने अतीत में अपनी ईएमआई या क्रेडिट कार्ड बिल में एक दिन की भी देरी की है, तो नया लोन मिलना नामुमकिन हो सकता है।
  • फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की सुरक्षा: हालांकि भारतीय बैंकिंग प्रणाली काफी सुरक्षित है, लेकिन बैंकों का एनपीए बढ़ने से जमाकर्ताओं का भरोसा प्रभावित होता है।

क्या जाँचें

एक जिम्मेदार ग्राहक और समझदार कर्जदार होने के नाते आपको अपने निजी वित्त का प्रबंधन बहुत सावधानी से करना चाहिए। किसी भी वित्तीय संकट या बैंकिंग सख्ती से बचने के लिए नीचे दी गई बातों का विशेष ध्यान रखें:

1. अपनी आय और क्षमता का आकलन करें: लोन या क्रेडिट कार्ड लेने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपकी सभी ईएमआई (EMI) मिलाकर आपकी कुल मासिक आय के 40-50% से अधिक न हों। 2. आपातकालीन फंड (Emergency Fund) बनाएं: कम से कम 6 महीने के खर्च और ईएमआई के बराबर राशि अलग बचत खाते या लिक्विड फंड में सुरक्षित रखें। 3. अनावश्यक लोन से बचें: केवल शौक, घूमने-फिरने या महंगे गैजेट्स खरीदने के लिए पर्सनल लोन या 'बाय नाउ पे लेटर' (BNPL) जैसी योजनाओं का उपयोग करने से बचें। 4. आधिकारिक जानकारी ही देखें: ब्याज दरों, प्रोसेसिंग फीस और लोन के नियमों में बदलाव की पुष्टि हमेशा संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या नजदीकी शाखा में जाकर करें। 5. क्रेडिट रिपोर्ट की नियमित जांच करें: समय-समय पर अपना सिबिल स्कोर चेक करते रहें और यदि उसमें कोई गलत एंट्री दिखे तो तुरंत उसे ठीक कराएं।

महत्वपूर्ण जानकारी

भरोसा (Bharosa) एक P2P लेंडिंग प्लेटफॉर्म है, नौकरी एजेंसी या सरकारी भर्ती पोर्टल नहीं। हम नौकरी दिलाने की गारंटी नहीं देते। पर्सनल लोन तभी लें जब EMI चुकाने की क्षमता हो। KYC दस्तावेज़, OTP, पासवर्ड या बैंक डिटेल किसी एजेंट, व्हाट्सऐप ग्रुप या अज्ञात लिंक पर साझा न करें। नौकरी या स्कीम की पुष्टि केवल आधिकारिक वेबसाइट और आधिकारिक नोटिफिकेशन से करें।

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