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बोगस राजनीतिक दलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, जानिए टैक्स छूट और बैंकिंग सिस्टम पर इसका असर
परिचय देश में राजनीतिक दलों को मिलने वाली आयकर छूट और चंदे के नियमों का दुरुपयोग लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ है। हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते
परिचय
देश में राजनीतिक दलों को मिलने वाली आयकर छूट और चंदे के नियमों का दुरुपयोग लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ है। हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए ऐसी 'कागज़ी' या पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों (RUPPs) के खिलाफ सख्त कदम उठाने की वकालत की है, जो कथित तौर पर केवल टैक्स चोरी और काले धन को सफेद करने के लिए बनाई जाती हैं।
भारतीय निर्वाचन आयोग और आयकर विभाग समय-समय पर ऐसे फर्जी राजनीतिक दलों पर नकेल कसते रहे हैं। देश के आम करदाताओं, नौकरीपेशा वर्ग और छोटे व्यापारियों के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि इस तरह की वित्तीय अनियमितताओं का देश की बैंकिंग प्रणाली, सरकारी राजस्व और आम जनता की जेब पर क्या असर पड़ता है।
विस्तार और पृष्ठभूमि
भारत में हजारों राजनीतिक दल पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें से कई दल कभी कोई चुनाव नहीं लड़ते। नियमों के मुताबिक, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) के तहत पंजीकृत दलों को आयकर अधिनियम की धारा 13A के तहत कई तरह की कर छूट मिलती है। इसी छूट का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व 'कागज़ी' पार्टियां बनाते हैं।
यह पूरा खेल मुख्य रूप से शेल कंपनियों और फर्जी लेन-देन के जरिए खेला जाता है। लोग इन फर्जी दलों को दान (Donation) देते हैं, जिस पर उन्हें धारा 80GGC के तहत 100% टैक्स छूट मिलती है। बाद में यह रकम कुछ कमीशन काटकर दानदाताओं को नकद वापस लौटा दी जाती है। इससे न केवल सरकारी खजाने को भारी नुकसान होता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में काला धन भी बढ़ता है।
चुनाव आयोग और आयकर विभाग का एक्शन
पिछले कुछ वर्षों में चुनाव आयोग ने ऐसे सैकड़ों राजनीतिक दलों को सूची से हटाया है जो केवल कागजों पर मौजूद थे। आयकर विभाग ने भी देशव्यापी छापेमारी कर करोड़ों रुपये के फर्जी दान रैकेट का पर्दाफाश किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक इन नियमों में कड़े बदलाव नहीं किए जाएंगे, तब तक टैक्स चोरी के इस 'कागज़ी' खेल को पूरी तरह से बंद करना मुश्किल होगा।
आम आदमी पर असर
जब कोई बड़ा वर्ग या संस्था अवैध तरीकों से टैक्स चोरी करती है, तो इसका सीधा और अप्रत्यक्ष प्रभाव देश के आम नागरिकों पर पड़ता है।
- ईमानदार करदाताओं पर बोझ: जब फर्जी दलों के माध्यम से अरबों रुपये की टैक्स चोरी होती है, तो सरकार के राजस्व में कमी आती है। इसकी भरपाई के लिए सरकार को अप्रत्यक्ष करों (जैसे GST) या अन्य शुल्कों में बढ़ोतरी करनी पड़ती है, जिसका असर हर आम आदमी पर पड़ता है।
- बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली में सख्ती: मनी लॉन्ड्रिंग और बोगस लेन-देन को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और बैंक नियमों को कड़ा करते हैं। इसके कारण आम लोगों को लोन (Loan), बैंक खाता खोलने या सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया में ज्यादा दस्तावेज देने पड़ते हैं।
- विकास कार्यों पर प्रभाव: टैक्स से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल देश में इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा और नौकरियों के अवसर पैदा करने में होता है। राजस्व का नुकसान होने से इन जनकल्याणकारी योजनाओं की गति धीमी हो जाती है।
- CIBIL और लोन जांच में सख्ती: वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के कारण बैंक अब किसी भी बड़े वित्तीय लेन-देन या लोन आवेदन की बहुत गहनता से जांच करते हैं।
क्या जाँचें
एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते, आपको अपनी वित्तीय सुरक्षा और कर देनदारियों के प्रति सतर्क रहना चाहिए। किसी भी वित्तीय लेन-देन या टैक्स सेविंग स्कीम को अपनाते समय निम्नलिखित बातों की जांच जरूर करें:
- आधिकारिक नोटिफिकेशन देखें: यदि आप किसी संस्था या दल को दान देकर टैक्स छूट का दावा कर रहे हैं, तो आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से उसकी वैधता जांच लें।
- केवल चेक या डिजिटल भुगतान करें: किसी भी प्रकार का चंदा या निवेश कभी भी अज्ञात व्यक्तियों को नकद में न दें। हमेशा बैंकिंग चैनलों (UPI, NEFT, चेक) का उपयोग करें।
- CA या टैक्स सलाहकार की सलाह लें: अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) को सही तरीके से भरें। फर्जी दावों या बोगस डोनेशन रसीदों के चक्कर में न पड़ें, अन्यथा आयकर विभाग का नोटिस आ सकता है।
- बैंकिंग सुरक्षा: अपने बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड या लोन से जुड़ी संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
महत्वपूर्ण जानकारी
भरोसा (Bharosa) एक P2P लेंडिंग प्लेटफॉर्म है, नौकरी एजेंसी या सरकारी भर्ती पोर्टल नहीं। हम नौकरी दिलाने की गारंटी नहीं देते। पर्सनल लोन तभी लें जब EMI चुकाने की क्षमता हो। KYC दस्तावेज़, OTP, पासवर्ड या बैंक डिटेल किसी एजेंट, व्हाट्सऐप ग्रुप या अज्ञात लिंक पर साझा न करें। नौकरी या स्कीम की पुष्टि केवल आधिकारिक वेबसाइट और आधिकारिक नोटिफिकेशन से करें।