Loans
Loan Interest Rates: इंडियन बैंक समेत 5 बड़े बैंकों ने बढ़ाया MCLR, आपकी लोन EMI पर होगा सीधा असर
परिचय भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में एक बार फिर से ब्याज दरों को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इंडियन बैंक सहित देश के पांच प्रमुख बैंकों ने अपने लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी क
परिचय
भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में एक बार फिर से ब्याज दरों को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इंडियन बैंक सहित देश के पांच प्रमुख बैंकों ने अपने लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। बैंकों द्वारा मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में की गई इस वृद्धि के कारण अब ग्राहकों के लिए लोन लेना और मौजूदा लोन की किस्तों को चुकाना महंगा हो जाएगा।
अगर आपने बैंक से होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन ले रखा है, तो इस बदलाव का सीधा असर आपके हर महीने के बजट पर पड़ने वाला है। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा रेपो रेट को स्थिर रखे जाने के बावजूद, बैंकों की ओर से फंड जुटाने की लागत बढ़ने के कारण यह कदम उठाया जा रहा है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस फैसले से आपके लोन और मासिक किस्त (EMI) पर क्या असर पड़ेगा।
विस्तार और पृष्ठभूमि
बैंकिंग प्रणाली में लोन की दरें तय करने के लिए MCLR एक बेहद महत्वपूर्ण पैमाना होता है। जब भी कोई बैंक अपने MCLR में संशोधन करता है, तो उससे जुड़े सभी प्रकार के वेरिएबल रेट वाले लोन अपने आप महंगे या सस्ते हो जाते हैं। हाल ही में इंडियन बैंक और चार अन्य प्रमुख वित्तीय संस्थानों ने अपनी विभिन्न अवधि (टैन्योर) के MCLR में कुछ बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की है।
इस बढ़ोतरी के पीछे का मुख्य कारण बैंकों की जमा दरों (Deposit Rates) में हुआ इजाफा और फंड की बढ़ती लागत है। जब बैंकों को ग्राहकों से जमा राशि जुटाने के लिए अधिक ब्याज देना पड़ता है, तो वे अपने लोन पोर्टफोलियो को संतुलित रखने के लिए कर्ज की दरों को बढ़ा देते हैं।
MCLR क्या है और यह कैसे काम करता है?
MCLR वह न्यूनतम ब्याज दर होती है जिस पर कोई भी बैंक अपने ग्राहकों को कर्ज दे सकता है। इसे भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा 2016 में पेश किया गया था। यह दर बैंक की फंड जुटाने की सीमांत लागत, परिचालन खर्च और कैश रिजर्व रेशियो (CRR) को ध्यान में रखकर तय की जाती है।
- एक रात से एक महीने का MCLR: यह मुख्य रूप से अति-अल्पकालिक (Short-term) लोन के लिए होता है।
- तीन से छह महीने का MCLR: व्यापारिक क्रेडिट और वर्किंग कैपिटल लोन के लिए लागू होता है।
- एक साल का MCLR: उपभोक्ता लोन जैसे होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
जब भी एक साल के MCLR में बढ़ोतरी होती है, तो रीसेट डेट (Reset Date) आने पर आपके लोन की ब्याज दर खुद-ब-खुद बढ़ जाती है।
आम आदमी पर असर
लोन महंगा होने का सीधा प्रभाव मध्यम वर्ग, वेतनभोगी कर्मचारियों और छोटे व्यापारियों पर पड़ता है। त्योहारों या वित्तीय वर्ष के दौरान जब लोग घर या गाड़ी खरीदने की योजना बनाते हैं, ऐसे समय में ब्याज दरों का बढ़ना उनके बजट को प्रभावित करता है।
- EMI की राशि में बढ़ोतरी: यदि आपने MCLR से जुड़ा लोन लिया है, तो रीसेट साइकिल पूरा होते ही आपकी मासिक किस्त (EMI) की राशि बढ़ जाएगी।
- लोन की अवधि बढ़ना: कुछ मामलों में बैंक EMI की राशि बढ़ाने के बजाय लोन चुकाने की कुल अवधि (Tenure) को बढ़ा देते हैं, जिससे आपको लंबे समय तक ब्याज देना पड़ता है।
- नया लोन लेना होगा महंगा: नए ग्राहकों के लिए अब इंडियन बैंक और इन 5 बैंकों से लोन लेना पहले की तुलना में अधिक खर्चीला हो जाएगा।
- सिबिल (CIBIL) स्कोर का ध्यान रखना जरूरी: EMI बढ़ने के कारण यदि आपकी किस्त समय पर नहीं जाती है, तो इसका नकारात्मक असर आपके सिबिल स्कोर पर पड़ सकता है।
- बजट का पुनर्मूल्यांकन: परिवार के मासिक खर्चों में से लोन की किस्त के लिए अधिक हिस्सा अलग रखना होगा, जिससे अन्य बचत पर असर पड़ेगा।
क्या जाँचें
यदि आपका खाता इंडियन बैंक या उन बैंकों में है जिन्होंने हाल ही में अपनी दरों में बदलाव किया है, तो आपको तुरंत कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए ताकि आप वित्तीय नुकसान से बच सकें:
1. अपनी लोन रीसेट डेट चेक करें: यह पता लगाएं कि आपके लोन का रीसेट क्लॉज कब लागू हो रहा है। दरें बढ़ने का असर रीसेट डेट के बाद ही आपकी EMI पर दिखाई देगा। 2. बैंक का आधिकारिक नोटिफिकेशन पढ़ें: किसी भी अफवाह पर ध्यान न देकर सीधे अपने बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और नई ब्याज दरों की तालिका (Interest Rate Chart) देखें। 3. EBLR या RLLR का विकल्प चुनें: अगर आपका लोन पुराने MCLR या बेस रेट से जुड़ा है, तो आप इसे रिज़र्व बैंक के एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR/RLLR) में ट्रांसफर करने पर विचार कर सकते हैं। 4. प्री-पेमेंट का विकल्प: यदि आपके पास अतिरिक्त बचत या बोनस का पैसा है, तो लोन के कुछ हिस्से का भुगतान (Part-payment) करके अपने कुल मूलधन को कम करें। इससे आपकी EMI का बोझ कम हो सकता है।
महत्वपूर्ण जानकारी
भरोसा (Bharosa) एक P2P लेंडिंग प्लेटफॉर्म है, नौकरी एजेंसी या सरकारी भर्ती पोर्टल नहीं। हम नौकरी दिलाने की गारंटी नहीं देते। पर्सनल लोन तभी लें जब EMI चुकाने की क्षमता हो। KYC दस्तावेज़, OTP, पासवर्ड या बैंक डिटेल किसी एजेंट, व्हाट्सऐप ग्रुप या अज्ञात लिंक पर साझा न करें। नौकरी या स्कीम की पुष्टि केवल आधिकारिक वेबसाइट और आधिकारिक नोटिफिकेशन से करें।